Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories – हेलो दोस्तों मेरा नाम मधु है और आज मैं अपने भाई के साथ हुई चुदाई की कहानी के बारे में बताने जा रही हूँ वैसे तो मैं दिखने में बहुत सुन्दर हूँ मेरे बूब्स बहुत मुलायम है मेरी मोती भरी हुई जंघे गोरी गोरी कोई लड़का अगर उनको देख ले तो पागल हो जाये .

वैसे तो मैं Hindi Sex Stories पड़ने की बहुत शौकीन हूँ लेकिन यह सब मेरे जीवन में होगा इसकी खबर कहा थी मुझे .

मुझे क्या पता था की इस कीड़े को चुदाई का कीड़ा कहते है और ये कीड़ा मुझे काट खायेगा .

चलो आप सब का समय न खराब करते हुए मैं सीधा कहानी पे आती हूँ मैं अपनी मौसी के घर आयी हुई थी मैं अभी सिफत १७ साल की कुवारी चूत थी लंड से मेरा कोई दूर दूर तक रिस्ता नहीं था मेरा मौसी का लड़का मुझसे बड़ा था करीब 20 साल का वो अक्सर अपने फ़ोन में गेम्स खेला करता था .

और बाकि घर के बच्चे उसके पास चिपक कर बैठा करते थे एक दिन उनके पास मैं भी बैठ गयी मैं तो 17 की हो चुकी थी इसलिए मेरे घुंडी जैसे बूब्स आ चुके थे अब थोड़ी देर उनके पास बैठने के बाद मुझे महसूस हुआ की मेरे कुंवारे बूब्स में भैया अपनी कोहनी रगड़ रहे है मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा था .

मानो मेरे सरीर में बिजली सी फ़ैल गयी हो मैं सिरह सी गयी मैं अब लंड को खा जाना चाहती थी लेकिन अभी टाइम था मेरी फूली हुई चूत को चुदने में .

इसलिए मुझे बहुत मज़ा आया मैं थोड़ी देर के बाद उठ कर चली गयी और अकेले में जेक अपने बूब्स को खूब मसला और खुद मज़ा लिया अब मेरा रोज़ का यही काम हो चूका था की जब भी भैया आये मैं उनसे सट कर बैठ जाऊ और अपने मस्त मलाई जैसे बूब्स को उनकी कोहनी से दबवाऊ खैर भैया तो मेरे बूब्स को रगड़ कर बाथरूम में चले जाते थे और मुठ मर लेते थे .

अब मैं फालतू की बाते बता के आप लोगो को पका सकती हूँ लेकिन मेरे पास काम वक़्त है इसलिए मैं सीधा अपनी Sex Story पे आती हूँ .

इसलिए दिमाक लगातार चल रहा था मैंने करीब 11 बजे घर पे शोर मचाया की मेरे रूम में कोई जीव है तो घर वाले इकठ्ठा हो गए और थोड़ी देर बाद मैंने कहा की आज मैं भैया के रूम में सो जाती हूँ सुबह रूम देखा जायगा सभी वापिस अपने अपने रूम्स में जाके सोने लगे मैं भैया के रूम में जाके उनके बेड पे लेट गयी .

मैंने सिर्फ एक हल्का सा लोअर पहन रखा था उसको भी थोड़ी देर के बाद नीचे कर दिया अब मेरी नंगी गांड भैया के लंड की तरफ थी थोड़ी देर बाद मुझे महसूस हुआ की मेरी गांड पर हाँथ लगाया जा रहा है मैं मन ही मन खुश हुई जा रही थी क्युकी आज मेरी चूत चुदने वाली थी .

फिर मेरी गांड पर भैया ने लंड टच कराया मनो मेरे पुरे सरीर में बिजली का झटका लग गया हो .

मानो मेरे सरीर में बिजली सी फ़ैल गयी हो मैं सिरह सी गयी मैं अब लंड को खा जाना चाहती थी लेकिन अभी टाइम था मेरी फूली हुई चूत को चुदने में .

अब भैया ने भी अपने नीचे के सारे कपडे निकाल दिए थे और मेरी मुलायम सी गांड पहले से ही खुली थी भैया ने कस के मुझे बहो में भर लिया और उनका कला नाग मेरी गांड में घुसा जा रहा था अब हम दोनों एक दूसरे को किश करने लगे भैया पागलो की तरह मेरे होठ चूस रहे थे पुच पुच पत्ताक .

की आवाज़ आ रही थी हम दोनों के होंठो से अब हम दोनों ने अपने पुरे कपडे निकाल दिए और दोनों पूरे नंगे होकर एक दूसरे को चिपक गए सरीर की गर्मी का मज़ा मुझे तब मालूम पड़ा भैया ने मेरे मुँह पे अपना लंड रख दिया और मुझसे बोले चुसो इसको .

इसको मैं लंड को चूसने में जुट गयी मैं लंड को लॉलीपॉप की तरह चाट रही थी एक दम भैया अकड़ गए और मुँह पर पानी निकाल दिया फिर वो नीचे आकर मेरी चूत चाटने लगे और उसमे उंगलिया घूमने लगे इसकी वजह से मैं सातवे आसमान पर पहुंच चुकी थी .

चाटने के बाद मेरे सरीर में बहुत प्यारा दर्द हुआ और मेरा पानी निकाल गया मैं थक कर लेट गयी फिर भैया ने उस रात मेरी चूत का भोसड़ा बनाया करीब १० मिनट बाद उनका लंड फिर तैयार हो चूका था उन्होंने मेरी चूत खोली मेरे दोनों पैरो के बीच और अपना लंड रख कर ज़ोर लगाया और एक बार में ही आधा लंड पेल दिया .

भैया ने चूत से लंड बाहर निकाला उस पर खून लगा था।उनके भी खून निकल रहा था मैंने आँख बंद करके हाथ से ही खून पौंछने की कोशिश की पर उससे सही से पूंछा नहीं मैंने एक अख़बार उठाया और चूत पूंछने लगी ।

थोड़ा खून चादर पर भी गिर गया था पर डार्क कलर होने की वज़ह से दिख नहीं रहा था। फिर मैने जग से पानी लेकर चादर से भी खून साफ कर दिया।
मैंने घड़ी देखी तो चार बज गये थे।

फिर मैंने अपनी चूत पर हाथ रख लिए क्युकी मुझे दर्द हो रहा था भैया ने अपने हाथ से मेरा हाथ हटाने लगे तो मैंने हाथ रखे हुए दूसरी तरफ करवट ले ली।

पर भइया को चैन नही था उन्होंने मुझे ज़बरदस्ती अपनी तरफ खींचा और मैं बड़ी मुश्किल से सीधी हो गयी। भैया दोबारा से हाथ हटाने की कोशिश करने लगे ।

अब मैंने भइया का हाथ पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर रख लिया। भैया ने धीरे से उसकी चूत में उंगली कर दी। मैं फिर तड़प उठी और जैसे ही मेरे हाथ की पकड़ ढीली हुई भैया ने मेरा हाथ हटा दिए। और मेरे ऊपर चढ गए .

भैया का खड़ा लंड मेरी चूत पर था। उन्होंने अपने लंड को पकड़ा और चूत पर रगड़ा अबकी बार ज़्यादा देर तक चूत पर रगड़ा और चिकने पानी से अपने लंड को तर कर लिया था।

फिर उन्होंने लंड को चूत के छेद पर रखा और ज़ोर से झटका मारा अबकी बार एक ही बार में लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में चला गया। अब वो देख रहा था कि मुझे जायदा दर्द तो नहीं हो रहा था खैर मैं वो दर्द सह गयी .

अब भैया धीरे- धीरे अपनी स्पीड बढा रहे थे । फिर भैया अपने लंड को पूरा अंदर बाहर करने लगे अब तो मैं भी मज़ा ले रही थी और मेरे मुँह से सी सिश आ आहा निकलने लगा .

मगर धीरे-धीरे भाई का लंड चूत से निकले पानी के कारण इतना चिकना हो गया था कि बिना रूकावट के मेरी बच्चेदानी के मुंह पर ही चोट कर रहा था ।

मैं झड़ चुकी थी। क्योंकि अब भाई ने मुझे कसकर पकड लिया था। जब मैं पूरी झड चुकी थी तो उसने मुझे छोड दिया। और अब उनको भी पता चल गया था की मैं झड चुकी थी। क्योंकि अब मैं भाईया को हटाना चाहती थी मैं अपने हाथ से उनको पीछे कर रही थी।

तभी भैया ने पूरा ज़ोर लगया और लंड को एक ही झटके में चूत में कर दिया था। मैंने भैया को चाहकर भी नही हटा पाई। फिर तो मैं बेबस सी हो गई।

अब वो ‍इस तरह ज़ोर ज़ोर से झटके मार रहा था कि लंड को पूरा बाहर निकाल कर पूरा अंदर करके चूत को मार रहा था।

मुझे अपनी बच्चेदानी का मुंह उनके लॅंड के आगे बार बार महसूस हो रहा था। फिर एक दम भइया के लंड से मेरी चूत में पानी की धार छूट गई। उसी समय मैं भी दुबारा झड़ रही थी।

फिर वो मेरे से अलग हो कर बराबर में लेट गया। मेरी ब्रा, कमीज़ और स्कर्ट का नाडा अभी भी खुला हुआ था और कच्छी भी उतरी हुई थी। हम दोनों हाफ रहे थे .

हम दोनों सुबह तक नंगे पड़े हुए थे सुबह के करीब पाँच बज चुके थे। फिर मैं अपने आप उठी और सबसे पहले उसने इधर उधर देखा। फिर मैंने भैया के उपर चादर डाली और लेट गई लेटे-लेटे ही उसने अपनी ब्रा का हुक लगाया।

भैया ये सब आँख बंद करके देख रहे थे । फिर मैंने अपनी कमीज़ सही करी और उसके बटन भी बंद करे फिर उसने स्कर्ट ठीक करी और कच्छी पहनी। फिर चादर में अपनी गांड को भैयया के लंड पर लगाकर लेट गई।

मुझे भी सेक्स का भूत सवार था जैसे ही मेरी गांड भैया के लंड पर लगी तो उनका लंड खड़ा हो गया और मेरी गांड के छेद में फस गया। अब मेरी गांड मरने की इच्छा होने लगी थी फिर उस दिन तो मैंने ऐसे ही उपर उपर झटके मारता रहा पर एक दिन मैंने उसकी गांड भी मार ही ली .

मैं सिकुड़ कर रह गयी मुझे लगा की इतना जलता लावा किसने मेरी गांड में डाल दिया लेकिन अगले धक्के में पूरा 6 इंच का लंड मेरी चूत फाड़ते हुए घुस गया और मुझे बहुत दर्द हुआ मैं काँप गयी आखिर में 17 साल की नयी जवान लड़की थी .

खैर मेरी गांड पर अब उनका लंड बरस पड़ा लगा तार पुचुक पुचुक की आवाज़ से कमरा गूंज रहा था पुचुक पुचुक थप थप मैं आह आह आह करती रह गयी और मज़े लेते लेते कब वो मेरी गांड में झाड़ गए पता ही नहीं चला अब हम जब भी मिलते है तो चुदाई ज़रूर करते है .

दोस्तों तो ये थी मेरी Sex Story मेरे भाई के साथ अगर आपको पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ shere करे .

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